Tue, December 06, 2022

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    रक्षा लेखा के प्रधान नियंत्रक का कार्यालय (पेंशन) रक्षा मंत्रालय के तहत रक्षा लेखा विभाग के कार्यालयों में से एक है, जिसका मुख्यालय रक्षा लेखा महानियंत्रक, नई दिल्ली के कार्यालय के साथ है।

  • विभाजन

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    पूरे देश में फैले सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, कोषागारों, डीपीडीओ, आईई काठमांडू और पीएओ के माध्यम से रक्षा पेंशन की मंजूरी, लेखा, लेखा परीक्षा और इसके वितरण की प्रणाली में उत्कृष्टता और व्यावसायिकता प्राप्त करना और पेंशनभोगियों की शिकायतों के निवारण के लिए कुशल, सही और त्वरित सेवाएं प्रदान करना

  • पेंशन स्थिति

    लिंक


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    उन व्यक्तियों के संबंध में पेंशन अधिसूचना की स्थिति के बारे में जानने के लिए लिंक प्रदान किए गए हैं, जिनका दावा पेंशन की मंजूरी के लिए प्राप्त हुआ है।

  • सुविज्ञा

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    सुविज्ञा एक कम्प्यूटरीकृत पेंशन जांच प्रणाली है जो भूतपूर्व सैनिकों के साथ-साथ नागरिक पेंशनभोगियों को कुछ बुनियादी जानकारी देने के बाद एक बटन के क्लिक पर पेंशन/पारिवारिक पेंशन/विकलांगता पेंशन के अपने अधिकारों को जानने में सक्षम बनाती है। जन्म तिथि, सेवामुक्ति की तिथि, प्रदान की गई कुल सेवा और रैंक आदि।

  • डीपीटीआई

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    रक्षा पेंशन प्रशिक्षण संस्थान (डीपीटीआई), इलाहाबाद का उद्घाटन तत्कालीन माननीय आरएम श्री ए के एंटनी ने 28 मार्च 2008 को तत्कालीन आरआरएम माननीय श्री एम एम पल्लम राजू की उपस्थिति में किया था। यह भारत का एकमात्र संस्थान है अपनी तरह का जो विशेष रूप से पेंशन मामलों पर प्रशिक्षण प्रदान करता है।

  • सूचना का अधिकार

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    अधिनियम की धारा 2 (एफ) सूचना को "रिकॉर्ड, दस्तावेज ज्ञापन, ई-मेल, राय, सलाह, प्रेस विज्ञप्ति, परिपत्र, आदेश, लॉगबुक, अनुबंध, रिपोर्ट, कागजात, नमूने, मॉडल सहित किसी भी रूप में किसी भी सामग्री के रूप में परिभाषित करती है। , किसी भी इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखी गई डेटा सामग्री और किसी भी निजी निकाय से संबंधित जानकारी जिसे किसी सार्वजनिक प्राधिकरण द्वारा किसी अन्य कानून के तहत किसी भी समय लागू किया जा सकता है"।

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उदारीकृत पारिवारिक पेंशन


भारत सरकार रक्षा मंत्रालय ने अपने पत्र दिनांक 24.2.72 सं.240047/पेन-सी/71 के तहत किसी प़ड़ोसी देश के विरुद्ध युद्ध में या निम्नलिखित कार्रवाईयों में मृत्यु या अशक्त हुए सैन्य सेवाओं के पी.बी.ओ.आर. जैसे गैर ल़ड़ाकू (एन सी( ई)) (सैन्य ड़ाक सेवा एवं रक्षा सुरक्षा कोर कर्मी ) कर्मियों के नामित वारिस को मूल वेतन + वृद्धि + रैंक वेतन + अच्छी सेवा वेतन + मँहगाई भता + गृह बचत तत्वों के बराबर उदारीकृत पेंशन एवार्ड़ स्वीकृत करने का निर्णय लिया था ।
  • 1947-48 की काश्मीर मुहिम, 1962,1965 का अन्तर्राष्ट्रीय युद्ध (कष्छ एवम कारगिल मुहिम को सम्मिलित करते हुए ), 1971 तथा गोवा एवं हैदराबाद मुहिम में ।
  • युद्ध समान मुहिम या, पाकिस्तान या अन्य देशों के साथ सीमा झ़ड़प स्वरुप गोली बारी या विदेशों में शांति बहाली मुहिम एवं नागा और मिजों की सैन्य विरोधी कार्रवाई में ।
  • सुरंगों के विछाने एवं निस्तारण के दौरान ।
उपरोक्त कार्रवाई एवं 1947-48 की मुहिम के पश्चात सभी मृत्यु कार्मिकों / उनके अगले नामांकित 1.2.72से यह लाभ स्वीकृति किया गया था।
इस श्रेणी के तहत अधिकारी रैंक से नीचे के नामांकित वारिसों को उदारीकृत पारिवारिक पेंशन अंतिम आहरित परिलब्धियों के बराबर मृत्यु तक अथवा अयोग्य होने तक देय होगा जिसमें वेतन +मँहगाई वेतन +वर्गीकृत वेतन +गतिरोध वृद्धि आदि शामिल हैं । यदि किसी पी.बी.ओ.आर. की पत्नी जीवित नहीं है किन्तु बच्चा/बच्ची (बच्चे) जीवित हैं तो 25 वर्ष की आयु अर्थात अयोग्यता होने तक सभी बच्चे गणनीय परिलब्धियों के 60% प्रतिशत के बराबर उदारीकृत पारिवारिक पेंशन के हकदार होंगे । वरिष्ठतम बच्चे की मृत्यु / अयोग्यता होने पर यह अन्य योग्य बच्चों की राशि में बाँट दी जाएगी । जब सभी बच्चे अयोग्य हो जाये तब भी अपंग बच्चे को निरंतर पारिवारिक पेंशन स्वीकृत की जाएगी । अपंग बच्चा जीवनपर्यन्त उदारीकृत पारिवारिक पेंशन के 60% भाग अनवरत रुप से प्राप्त करता रहेगा ।
पारिवारिक पेंशन प्राप्तकर्ता यदि मृतक के अन्य आश्रितों की सहयोग करने से इनकार करता है तो , ब्रांच रि्क्रूटिंग आफिसर(बी आर ओ) की जाँच रिपोर्ट के आधार पर पारिवारिक पेंशन को प्रारम्भिक स्वीकृति के साथ ही साथ विभाजित किया जा सकता है । बी आर ओ की प्रस्तुत रिपोर्ट की आवश्यकता के आधार पर रक्षा लेखा प्रधान नियंत्रक (पेंशन) इस प्रकार से पेंशन का विभाजन करेगा कि किसी भी हालत में विधवा का पेंशनरी भाग साधारण पारिवारिक पेंशन से कम न हो ।

पेंशन नियमों की शर्तानुसार यदि मृतक का विवाह हो चुका है और अपनी मृत्यु के पूर्व से ही अपने माता-पिता के पक्ष में किया गया नामांकन, पत्नी के पक्ष में माता-पिता की सहमति से उचित कार्रवाई हेतु कदम उठाया जायेगा । किंतु यदि माता-पिता सेवा नहीं करते हैं तो इसके निवारण हेतु उपयुक्त पैरा के अनुसार पेंशन के बँटवारे की कार्रवाई प्रारम्भ की जायेगी ।

जहां तक पारिवारिक पेंशन के स्थानान्तरण का प्रश्न है किसी कारणवश पारिवारिक पेंशन विधवा के अपेक्षा किसी अन्य वारिस को दी गयी है तो यह विधवा के पक्ष में स्थान्तरित हो जायेगी ।

पी बी ओ आर के मामले में द्वितीय लाइफ अवार्ड़ निम्नानुसार विनियमित किया जायेगा होगा:
  • यदि पारिवारिक पेंशन के प्रथम प्राप्तकर्ता (माता-पिता की अपेक्षा कोई अन्य ) की 7वर्ष के पूर्व ही मृत्यु हो जाता है या वह अयोग्य हो जाता है तो अवशेष सात वर्षो के लिए उदारीकृत पारिवारिक पेंशन का 60% की दर से द्वितीय लाइफ अवार्ड़ जारी रहेगा ।
  • जब उदारीकृत पारिवारिक पेंशन का प्रथम लाइफ अवार्ड़ माता-पिता को तथा पुनर्विवाहित विधवा को स्वीकृत किया गया है तथा विधवा बच्चों (बच्ची) को सहयोग करती है या यदि बच्चे (बच्ची) नहीं है तो, विधवा उदारीकृत पारिवारिक पेंशन का 60% की दर से विशेष पारिवारिक पेंशन के बराबर पुनर्विवाह की तिथि से पारिवारिक पेंशन की हकदार होगी एवम माता-पिता भी दुर्घटना घटित होने की तिथि से अवशेष सात वर्षों के लिए एवम उसके बाद 7 वर्ष तक उदारीकृत पारिवारिक पेंशन के 60% के बराबर प्राप्त करेंगे और सात वर्षों के पश्चात यदि विधवा पुनर्विवाह करती है तो, विधवा उदारीकृत पारिवारिक पेंशन के 60% भाग प्राप्त करेगी एवम माता पिता उदारीकृत पारिवारिक पेंशन का 30% की दर से पारिवारिक पेंशन प्राप्त करेंगे । माता पिता की मृत्यु या उनके अयोग्य होने पर विधवा उदारीकृत पारिवारिक पेंशन के बराबर पारिवारिक पेंशन जीवनपर्यन्त प्राप्त करेगी और यदि विधवा बच्चों को सहयोग नहीं करती है तो विधवा साधारण पारिवारिक पेंशन (गणनीय परिलब्धियों का 30%) पुनर्विवाह तिथि से जीवनपर्यन्त प्राप्त करेगी एवम माता पिता 7 वर्षों के अन्दर ही दुर्घटना घटित होने पर यदि वे बच्चों को सहयोग करते हैं तो दुर्घटना की तिथि से 7 वर्षों के अवशेष काल तक उदारीकृत पारिवारिक पेंशन के 100% की दर प्रथम लाइफ एवार्ड़ के रुप में प्राप्त करेंगे । अन्यथा माता पिता को देय राशि बच्चों तथा माता पिता में बराबर रुप से विभाजित हो जाएगी । प्रारम्भिक 7 वर्षों के पश्चात दुर्घटना की तिथि से 7 वर्षों के पश्चात विधवा पुनर्विवाह करती है और यदि माता पिता बच्चों को सहयोग करते हैं तो वे उदारीकृत पारिवारिक पेंशन का 60% प्राप्त करेंगे । यदि माता पिता भी बच्चों का सहयोग नहीं करते हैं तो देय राशि बच्चों एवम माता पिता में बराबर से विभाजित हो जायेगी । मृतक माता पिता की मृत्यु या अयोग्यता पर वरिष्ठतम योग्य बचा उदारीकृत पारिवारिक पेंशन का 60% की दर से पारिवारिक पेंशन प्राप्त करेगा और नियमानुसार यह राशि दूसरे योग्य बच्चे को स्थानांतरित हो जायेगी ।

भारत सरकार ने रक्षा मंत्रालय के पत्र दिनांक 31.1.01 पैरा 6.6 (बी) में विधवा के पुनर्विवाह के प्रति और अधिक नरम दृष्टिकोंण अख्तियार किया है । यदि वह पुनर्विवाह के पश्चात लगातार बच्चों को सहयोग करती है या बच्चे नहीं है तो वह उदारीकृत पारिवारिक पेंशन का 100% का लाभप्राप्त करेगी अथवा उसके बच्चे नहीं है किन्तु यदि पुनर्विवाह के पश्चात बच्चों को सहयोग नहीं करती है तो उसे उदारीकृत पारिवारिक पेंशन के 30% की दर से साधारण परिवार पेंशन स्वीकृत होगी एवम उदारीकृत पारिवारिक पेंशन के 60%की दर से योग्य बच्चों को विशेष परिवार पेंशन स्वीकृत होगी ।

मातृभूमि के लिए वीर जवानों द्वारा किये सर्वोच्च बलिदान की महत्ता एवम उत्साह के कारण उत्पन्ऩ जोखिम एव कठिनाईयों के मद्देनजर भारत सरकार ने रक्षा मंत्रालय दिनांक 8.10.96 के पत्र सं. बी/39902//एजी/पी एस-4(ड़ी)/2069/ड़ी (पेंशन /सेवाएँ) के तहत सैन्य कर्मियों ने दुश्मन की कार्रवाई सीमान्त मुठभे़ड़ में अपनी राष्ट्र विरोधी तत्वों, ड़कैतों व स्मगलरों से ड़यूटी के दौरान सैन्य भि़ड़न्त में सामना होने पर यदि मृत्यु को प्राप्त होते हैं तो उनके परिवार जनों को एक्स ग्रेसिया (अनुग्रह राशि) अवार्ड़ स्वीकृत किया जाता है ।

यह अवार्ड़ दिनांक 20.8.93 से ऐसे कार्मिकों को जो उपयुर्क्त परिस्थितियों में मारे गये हैं या मृत्यु हुयी हैं उनके अगले वारिस को जो अभी तक उदारीकृत पारिवारिक पेंशन प्राप्त कर रहे हैं; निम्नलिखित दर से स्वीकृत की जाएगी ।


  1. रु.1लाख की दर से दिनांक 20.8.93 से 30.4.95 के मध्य दुर्घटना होने पर ।
  2. रु.2 लाख की दर से दिनांक 1.5.95 से 31.7.97 के मध्य दुर्घटना होने पर ।
विभिन्ऩ परिस्थितियों के तहत 1.8.97 से 31.12.2005 हताहत हुए कार्मिक की निम्नलिखित दर वैसा ही ।
5 लाख रु.कर्तव्य निर्वहन के दौरान जब मृत्यु हो जाती है ।
5 लाख रु. समाज विरोधी / राष्ट्र विरोधी तत्वों द्वारा अशांति कार्रवाई के विरुद्ध कर्तब्य निर्वहन के दौरान मृत्यु हो जाने पर ।
7.50 लाख रु. अन्तर्राष्ट्रीय युद्ध , सीमा झ़ड़प एवं उग्रवादी आतंकवादी एवं चरमपांथयों के विरुद्ध सैन्य कार्रवाई के दौरान मृत्यु हो जाने पर ।
10लाख रु.या ऐसे युद्ध कार्रवाई जो सरकार द्वारा विशेष रुप से अधिसूचित हो (यह दिनांक 1.5.99 से 31.10.99 के मध्य देय है )

21 अक्टूबर 2008 के अनुसार मृतक सैन्यकर्मी के NOK को अनुकम्पा राशि की वर्तमान दरें निम्न प्रकार से परिशोधित की गई हैं- (1.1.2006 से लागू)

i. सेवा के दौरान दुर्घटना के कारण हुई मृत्य 10 लाख
ii. सेवा के दौरान आतंकवादियों द्वारा हिंसात्मक गतिविधियों से सम्बन्धित मृत्यु 10 लाख
iii. युद्व में शत्रु कार्यवाई या सीमा पर हुई लड़ाई या आतंकवादियों / लड़ाकुआंे के विरूद्व गतिविधियों के दौरान हुई मृत्यु - 15 लाख
iv. विशिष्ठ उच्च तंगता क्षेत्र, अगम्य सीमा चैकी इत्यादि में प्राकृतिक आपदाओं, विषम मौसमी परिस्थितियों के कारण सेवा के दौरान हुई मृत्यु 15 लाख
v. अंतर्राष्ट्रीय युद्व या युद्व जैसी स्थितियों में संलिप्तता जो कि विशिष्ठ रूप से अधिसूचित हों के दौरान शत्रु गतिविधियों में हुई मृत्यु 20 लाख


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